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 सफलता के सफर में हममें से लगभग सबों ने अपने आस पास के ऐसे लोगों से प्रेरणा अवश्य ली होगी जिनकी जिंदगी हमारे जैसी ही होती है पर अपने जज्बे और साहस से उन्होंने एक मुकाम हासिल किया होता है.  ये कहानियां लम्बे समय तक हमारे दिमाग में जिन्दा रहती हैं और इन्हें आवाज देने को हमारा जी चाहता है. ऐसी कहानियों के नायक (नायिकाएं) हमारे हीरो होते हैं. इन्ही को समर्पित है यह ब्लॉग  तू मेरा हीरो . इस ब्लॉग की पहली कहानी है  ड़ॉ० दिव्या सागर  की. तो क्यों ना शुरू करें  उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी : Dr Divya Sagar ऐसे शुरू  हुई जिंदगी की जंग "मेरा नाम दिव्या सागर है. मैं नालंदा जिले के  बिहारशरीफ से बिलोंग करती हूँ.मेरे पिता जी पेशे से वकील हैं और मेरी माँ सरकारी स्कूल में शिक्षिका (अभी प्रधानाध्यापिका ) हैं. एक समय की बात है. मैं बहुत बीमार थी.  एक डॉक्टर से दिखाने मैं  एक अस्पताल में गयी. डॉक्टर ने मरीजों को देखने का समय सुबह 9 बजे से दिन के 1 बजे तक रखा हुआ था. वहां बहुत सारे मरीज और भी थे. सभी की हालत ख़...